अम्मी
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अम्मी
ज़िन्दगी की तपती धूप में
घने दरख़्त की मानिन्द थीं
जिनके साये में
हमारी रूह सुकून पाती थी...
अब अम्मी नहीं हैं
उम्र का तवील सफ़र है
राह में दुश्वारि...
रविवार, अगस्त 15, 2010
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