वो मेरे महबूब हैं
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महबूब... महबूब और इश्क़... इश्क़ और इबादत... इबादत और ख़ुदा... आसमान के काग़ज़
पर चांदनी की रौशनाई से महबूब का तअरुफ़ लिखने बैठें, तो कायनात की हर शय छोटी
प...
रविवार, अगस्त 15, 2010
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